What is 3D printing technology and Use in hindi (3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी क्या है इसका उपयोग )


दोस्तों आइये आज हम लोग जानते हैं  3D printing technology के बारे में। थ्री डी टेक्नोलॉजी की कल्पना भले ही बेजान तस्वीरों को जीवंत बनाने के लिए की गयी हो, पर अब इसका दायरा काफी विस्तृत हो चुका है। यहां तक कि थ्री डी टेक्नोलॉजी से अब मनचाही चीजों के निर्माण की कोशिश की जा रही है। इसमें जादू की छड़ी साबित हो रहा है थ्री डी प्रिंटर जिससे कुछ साल बाद मानव अंग निर्माण की भी उम्मीद है। कहते हैं आंखों देखा ही सच होता है, लेकिन थ्री डी टेक्नोलॉजी के मामले में यह सच नहीं है। आइये आज इसी विषय पर विस्तार से जानते हैं।

3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी क्या है इसका उपयोग क्या है ?

3d
3D
थ्री डी तस्वीरें आपके मस्तिष्क को कुछ इस तरह से धोखा देती हैं कि वो यह मानने पर मजबूर हो जाता है कि जो कुछ वह देख रहा है। बिल्कुल सच है, थ्री डी तस्वीरें किसी खूबसूरत पेंटिंग या फोटोग्राफी तस्वीर की तरह सपाट नहीं होतीं, बल्कि उनमें 'गहराई' होती है। बिल्कुल हमारे आसपास की असली दुनिया की तरह। तभी तो आप 3D फिल्म देखते समय परदे पर दिखायी जा रही चीजों को हाथ बढ़ा कर पकड़ने की कोशिश करते हैं।

2D और 3D में अंतर 

हम जिस दुनिया में रहते हैं और रोजमर्रा के कामकाज करते हैं, वह दुनिया विज्ञान की भाषा में 2D है. यहां डी का अर्थ है ‘डायमेंशन’ इसे इस तरह से समझ सकते हैं। अगर आप दीवार पर टंगी किसी तस्वीर को देखते हैं, तो वह सपाट नजर आती है, क्योंकि उसमें दो ही विमाएं या डायमेंशंस होते हैं- लंबाई और चौड़ाई।
अगर आप खिड़की खोल कर बाहर नजर डालें, तो आपको बाहर की हर चीज जीवंत नजर आती है, क्योंकि खिड़की के बाहर मौजूद चीजों की तरह आप अपने आसपास की चीजों के बारे में भी अंदाजा लगा सकते हैं, कि वो आपसे कितनी दूरी पर हैं।

    इसे भी पढ़े -

                  Artificial Intelligence (AI) full detail in hindi
ये ‘गहराई’ ही वह ‘तीसरा डायमेंशन’ है जो दो डायमेंशन वाली बेजान सपाट तस्वीरों को जीवंत बना देती है. मानो वे हमारे आसपास की दुनिया का ही हिस्सा हों। इसीलिए थ्री डी फिल्म देखते वक्त दर्शक परदे पर दिखायी जा रही तस्वीरों को जीवंत मान कर उन्हें पकड़ने के लिए हाथ बढ़ा देते हैं।




3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग  

3d technology

3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी की मदद से कृषि क्षेत्र के औजारों से लेकर, भवन निर्माण, इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, सेना, इंजीनियरिंग, दंत चिकित्सा, मेडिकल इंडस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी (मानव कोशिकाओं के बदलाव), फैशन, फुटवियर, ज्वैलरी, आईवियर, शिक्षा, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स, फूड और कई दूसरे क्षेत्रों की चीजें आसानी से घर बैठे बनायी जा सकती हैं।

3D प्रिंटर एक जादू की छड़ी जैसा है। बस आप सोचिए और यह टेक्नोलॉजी उसे साकार कर दिखायेगी। अमेरिका में तो थ्री डी प्रिंटर की मदद से पिस्तौलें और राइफलें भी बनायी जा रही हैं। हालांकि यह इस टेक्नोलॉजी का एक दूसरा और चिंताजनक पहलू भी है। थ्री डी प्रिंटर का सीमित इस्तेमाल अभी अमेरिका और यूरोप के देशों में हो रहा है, यह टेक्नोलॉजी अभी भारत में उपलब्ध नहीं है।


3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपयोग 


दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष अंग प्रत्यारोपण के लिए डोनर का इंतजार कर रहे हजारों लोगों की मौत हो जाती है। इस तसवीर को बदलने में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 'थ्री डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी' एक वरदान साबित हो रही है। 'थ्री डी प्रिंटर' के इस्तेमाल से मानव अंग भी बनाये जा सकते हैं।
'थ्री डी प्रिंटर' से मानव अंग बनाने के लिए स्टेम सेल की मदद से प्रयोगशाला में बनायी गयी मानव कोशिकाओं को कच्चे माल की तरह इस्तेमाल किया जायेगा। वैज्ञानिक अब मानव लिवर और हड्डियों को 'थ्री डी प्रिंटर' से बनाने की तैयारी में जुटे हैं।

Post a Comment

0 Comments